प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के दो वरिष्ठ नेताओं ने मंगलवार को पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. इनमें से एक माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) था और चार दशकों से अधिक समय से भूमिगत था.
तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी शिवधर रेड्डी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि भाकपा (माओवादी) का केंद्रीय समिति सदस्य पुल्लुरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना (64) और तेलंगाना राज्य समिति के बंडी प्रकाश उर्फ प्रभात ने उग्रवाद छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है. चंद्रन्ना 45 साल से जबकि प्रभात 42 साल से भूमिगत था.
पेड्डापल्ली जिले का मूल निवासी चंद्रन्ना 1979 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन में शामिल हो गया. वहीं मंचेरियल जिले का प्रभात 1983 में भाकपा (एमएल) पीपुल्स वार में शामिल हो गया.
पुलिस ने बताया कि प्रभात हाल तक तेलंगाना राज्य समिति की प्रेस टीम का प्रभारी था और प्रभात नाम से प्रेस बयान जारी करता था. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रेड्डी ने कहा कि उनका आत्मसमर्पण तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी द्वारा 21 अक्टूबर को भाकपा (माओवादी) सदस्यों से हथियार छोड़ने, मुख्यधारा में शामिल होने और राज्य के विकास तथा कल्याणकारी पहल में भाग लेने की अपील के बाद हुआ है.
पुलिस ने बताया कि दोनों नेताओं ने संगठन छोड़ने के कारणों में बिगड़ती सेहत, सुरक्षाबलों का लगातार दबाव, वैचारिक मतभेद और भाकपा (माओवादी) नेतृत्व के भीतर आंतरिक मतभेद का हवाला दिया.
डीजीपी रेड्डी ने कहा कि, दो वरिष्ठतम माओवादी नेताओं की मुख्यधारा में वापसी, भाकपा (माओवादी) के विरुद्ध तेलंगाना पुलिस द्वारा अपनाई गई समग्र एवं व्यापक नीति की नैतिक जीत है.” उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक दो केंद्रीय समिति सदस्यों और आठ राज्य समिति सदस्यों सहित 427 भूमिगत कार्यकर्ताओं ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. उन्होंने कहा कि, तेलंगाना के 64 माओवादी अभी भी फरार हैं. डीजीपी ने कहा कि, पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग सही नहीं है. अगर जरूरत पड़ी तो पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगी.
