तेलंगाना राज्य सरकार ने जीएचएमसी (Greater Hyderabad Municipal Corporation) और आउटर रिंग रोड के भीतर स्थित सरकारी स्कूलों में कॉर्पोरेट स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. सरकार ने गरीब, निम्न-मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के बच्चों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है.
राजधानी में कॉर्पोरेट और निजी स्कूलों की भारी फीस अभिभावकों पर भारी पड़ रही है. ऐसे में, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी हैदराबाद के सरकारी स्कूलों का स्वरूप बदलकर और उन्हें दिल्ली की तर्ज पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र बनाने की तैयारी में हैं. उन्हें उम्मीद है कि इससे अभिभावकों पर से फीस का बोझ कम होगा. इस दिशा में, सीएम रेवंत रेड्डी ने पहले स्कूलों का स्वरूप बदलने और खेल मैदान, प्रयोगशाला, पुस्तकालय आदि सभी सुविधाएं प्रदान करने का आदेश दिया था.
उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में एक कार्य योजना तैयार करने की सलाह दी थी. मुख्यमंत्री के आदेश पर, स्कूल शिक्षा निदेशक नवीन निकोलस ने सीआरपी (क्लस्टर रिसोर्स पर्सन) के साथ एक सर्वेक्षण किया. सैकड़ों सवालों के साथ जानकारी एकत्र की गई. जैसे कि ओआरआर (पूरे हैदराबाद, मेडचल, रंगारेड्डी और संगारेड्डी ज़िलों के कुछ हिस्से) में स्थित स्कूलों के पास स्थायी भवन है या नहीं, उनके पास कितनी जगह है, क्या सुविधाएं हैं, आदि.
क्या है तैयारीः
- सर्वेक्षण के अनुसार, ओआरआर क्षेत्र में 1,346 स्कूल हैं
- इनमें से 246 किराए के भवनों में हैं
- किराए के भवनों को सरकारी परिसरों में स्थानांतरित किया जाएगा
- प्राथमिक विद्यालयों में नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी की कक्षाएं शुरू की जाएंगी
- यदि पर्याप्त जगह होगी, तो उन्हें उच्च विद्यालयों में अपग्रेड किया जाएगा
- यदि आवश्यक समझा गया, तो उन स्थानों पर नए प्राथमिक विद्यालय शुरू किए जाएंगे जहां उच्च विद्यालय हैं
पावर पॉइंट प्रेजेंटेशनः
शुक्रवार को मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने राजधानी के स्कूलों की स्थिति पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिया. उन्होंने बताया कि स्कूलों में सुविधाएं जुटाने के लिए लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता का अनुमान जताया. इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जाएं और अगले शैक्षणिक वर्ष (2026-27) से नए स्कूल स्थापित किए जाएं.
