तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बुधवार को अधिकारियों को आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने का आदेश दिया. हैदराबाद के मंसूराबाद इलाके में आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में एक अक्षम लड़का घायल हो गया था.
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब तेलंगाना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) को आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके पुनर्वास के बारे में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस को लागू करने का आदेश दिया है.
हैदराबाद के मंसूराबाद में मंगलवार को आवारा कुत्तों के झुंड ने अक्षम लड़के पर हमल किया था. इस घटना के बाद मुख्यमंत्री रेड्डी ने अधिकारियों से लड़के की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी ली और उन्हें उसका इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. रेड्डी ने अधिकारियों को आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने और यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.
मंसूराबाद के पास एलबी नगर में शिवगंगा कॉलोनी में रहने वाले प्रेमचंद नाम के एक लड़के पर मंगलवार दोपहर करीब 15 से 20 आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया, जब वह अपने घर के बाहर खेल रहा था. लड़का बोलने में असमर्थ था, इसलिए वह मदद के लिए चिल्ला भी नहीं सका, जबकि कुत्ते उसे नोचते रहे. जब एक स्थानीय व्यक्ति ने लड़के को देखा, तो वह एक डंडा लेकर उसे बचाने के लिए दौड़ा और मदद के लिए 108 नंबर पर डायल किया.
शुरू में लड़के को नल्लाकुंटा के फीवर हॉस्पिटल ले जाया गया और फिर डॉक्टरों की सलाह पर निलोफर हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया, जहां अभी इमरजेंसी वार्ड में उसका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों ने बताया कि लड़के के सिर, कमर और पीठ पर कुत्तों के काटने के कई गंभीर घाव थे, जबकि उसके कान का एक हिस्सा कट गया था. उन्होंने कहा कि अगर इलाज में देरी होती तो प्रेमचंद को बड़ा नुकसान हो सकता था.
लड़के के माता-पिता, सीएच तिरुपति राव और चंद्रकला, आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के रहने वाले हैं और परिवार शिवांगंगा कॉलोनी में रहता है.
मंगलवार को ही तेलंगाना हाई कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों को पकड़कर, उनकी नसबंदी करके, वैक्सीन लगाकर शेल्टर सेंटर में भेजा जाना चाहिए. कोर्ट ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को इस मामले में 9 दिसंबर को खुद या वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये पेश होने का आदेश दिया.
जस्टिस बी विजयसेन रेड्डी ने एसोसिएशन फॉर एनिमल शेल्टर एंड रेस्क्यू एड (ASRA) की एक याचिका पर सुनवाई की. इसमें आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए गाइडलाइंस लागू करने की मांग वाली याचिका को कोर्ट द्वारा नजरअंदाज करने को चुनौती दी गई थी. दलीलें सुनने के बाद, याचिकाकर्ता को GHMC के दो पशु आश्रय में जाने, जगह के अंदर मोबाइल फोन ले जाने और तस्वीरें और वीडियो लेने की इजाजत दी गई. अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी.
